घर की देखरेख करने वाली केवल महिलाएं होती है जो काम महिलाएं कर सकती है। ऐसे में महिलाओं का अस्वस्थ होना घर की बड़ी परेशानी बन जाती है और आज कल हर घर मे महिलाओं को घुटने की समस्या होने लगी है जो कि अब एक आम बात हो चुकी है। ऐसे ही एक दिल्ली की रहने वाली महिला है जिन्हें घुटनों के दर्द की परेशानी इस कदर बढ़ गई कि वह हर काम से लाचार होती चली गई।

इनका नाम मंजू चोपड़ा जी है। जिन्हें कई सालों से घुटनों की समस्या ने परेशान कर रखा था इन्हें हर समय कोई न कोई तकलीफ बनी ही रहती थी। उनके जीवन में मानो अंधेरा ही छा गया था। लेकिन कहते है वक्त किसी का एक जैसा नहीं रहता है आज बुरा तो कल अच्छा भी आता ही है। ऐसे ही मंजू जी के साथ हुआ उनका बुरा वक्त टल गया और उनके जीवन में खुशियां लौट आई। जहां वह एक गिलास पानी उठाकर नहीं ले सकती थी आज वही महिला अपने घर के सारे काम खुद कर लेती है लेकिन मंजू चोपड़ा ने अपना ये समय किस तरह बिताया आइए जानते हैं? और ये भी जानेंगे कि उन्हें दर्द में आराम कैसे मिला?
आखिर कौन है मंजू जी, जानिए सच्ची कहानी?
55 साल की महिला मंजू चोपड़ा दिल्ली के शकरपुर कॉलोनी में रहती है। यहां वह अपने पूरे परिवार के साथ रहती है। मंजू जी काफी नम्र स्वभाव की महिला है जो एक हाउस वाइफ है उनके ऊपर पूरे घर की जिम्मेदारियां है। वह खुद ही घर के सारे काम किया करती, उन्होंने कोई भी कामवाली नहीं रखी हुई है वह अपने काम खुद करना पसंद करती है यहां तक की वह अपनी बूढ़ी सास की भी सेवा करती है। जब मंजू जी को घुटनों की तकलीफ हो गई थी तो उनके पति ने उनका पूरा साथ दिया उनके पति उन्हे पानी लाकर दिया करते थे क्योकि मंजू जी घुटने के दर्द से इतनी परेशान थी की वह बैड से उठ भी नहीं पाती थी। उन्होंने यह दर्द काफी साल तक सहा क्योंकि उन्हें कोई रास्ता नहीं मिल रहा था की वह सही हो सकें। ऐसे में मंजू जी का जीवन बिल्कुल बेकार हो चुका था।
आपको बता दें कि मंजू जी को हर समय बस तकलीफ रहा करती थी। वह अपने घर के काम भी नहीं कर पाती थी। यहां तक की उन्हें टॉयलेट जाने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता था उन्हें इस समस्या में नींद भी ज्यादा आती थी घर परिवार वाले उनकी ऐसी हालत को देख कर काफी दुखी रहते थे। उनके परिवार वालों ने मंजू जी की परेशानी को देखते हुए कई डॉक्टरों को भी दिखाया। लेकिन कहीं कोई असर नहीं हुआ इतना ही नहीं डॉक्टरो ने तो ऑपरेशन तक के लिए कह दिया था। जिसे सुनकर मंजू जी घबरा गई थी वो ऑपरेशन नहीं करवाना चाहती थी इसलिए उन्हें अगर कोई कुछ भी बताता किसी भी डॉक्टर के बारे मे बताते तो वो उनपर विश्वास करके वही जाती जहां उन्हे बताया जाता लेकिन अंत मे निराशा ही हाथ लगती। ऐसे करते करते उन्होंने कई दवाओं का सेवन किया लेकिन वह बताती है कि इन सबका असर भी कुछ ही समय के लिए रहता फिर दर्द बढ़ जाता था। वह चलने के लिए दीवारों का सहारा लिया करती थी। बिना सहारे वह उठ भी नहीं पाती थी, वह कभी कभी खूब रोया करती थी। उन्हें जमीन पर घिसटकर भी चलना पड़ता था। उन्होंने इस दर्द को काफी लंबे समय तक सहा लेकिन फिर एक दिन सब सही होता चला गया। उनके जीवन में उजाला ही हो गया। पर कैसे जानने से पहले जानते है की उनके जीवन मे और क्या क्या परेशानी आई।
आखिर दर्द ने जिंदगी को कैसे मुश्किल बना दिया था?
- मंजू जी बिना सहारे बिस्तर से उठ भी नहीं पाती थीं।
- टॉयलेट आने-जाने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता था।
- राहत न मिलने और लगातार दर्द रहने के कारण वह काफी दुखी रहती थीं
एक फैसला जिसने बदल दी पूरी कहानी। जानें कैसे जुड़ी मंजू जी हकीम साहब से?
अपने वो कहावत तो सुनी ही होगी की भगवान के घर देर है अंधेर नहीं! अगर इंसान के मन मे उम्मीद हो तो वो कुछ भी कर सकता है है ऐसा ही मंजू जी के साथ भी हुआ, ऐसे ही एक दिन जब मंजू जी अपना टी.वी खोलकर चैनल देख रही थी तो उनकी नजर हकीम सुलेमान खान साहब जी के सबसे चर्चित शो सेहत और जिंदगी पर पड़ी। उसमें कई लोग अपनी परेशानी को बता रहे थे और हकीम जी सभी की तकलीफ को सुनकर यूनानी बूटी के बारे में बता रहे थे इस शो को देखकर मंजू जी को उम्मीद जागी की वह भी अपनी परेशानी को कम कर सकती है। इसलिए उन्होंने तुंरत ही शो में दिखाए गए नंबर पर कॉल किया और अपनी पूरी परेशानी को बताया जिसके बाद हकीम साहब की टीम ने उनकी परेशानी को समझा और फिर गोंद सियाह खाने की सलाह दी। जिसके बाद मंजू जी ने बिना देर लगाए ATIYA HERBS की ऑफिशियल वेबसाइट गोंद सियाह मंगा लिया। कुछ समय तक मंजू जी ने अपनी परेशानी को कम करने के लिए गोंद सियाह को सेवन किया जिसके बाद उन्हें अपनी समस्या कम होती दिखाई देने लगी। उन्होंने हकीम साहब द्वारा बताई गई बूटी के सेवन के साथ-साथ नमक जैतून भी लिया और उन्होंने हकीम जी के घरेलू नुस्खे भी आजमाएं, जिससे उन्हें अपनी तकलीफ पहले से कम होती दिखाई देने लगी। चलिए जानते हैं उनके जीवन में क्या-क्या बदलाव आए?
घुटनों की तकलीफ कम होने के बाद क्या बदला?
- दीवारों का सहारा लेने और ज़मीन पर घिसटने की नौबत अब नहीं।
- घुटने के ऑपरेशन का डर अब नहीं है मंजू जी को।
- पहले की तरह अब आसानी से कर लेती हैं घर के काम
अब हर दिन पहले से बेहतर है: मंजू जी
वो कहते है न जिंदगी का एक छोटा सा मोड भी जिंदगी मे वो बदलाव ल देता है जिसकी उम्मीद शायद ही किसी ने की होती! ऐसा ही मंजू जी के साथ भी था, कभी वह दर्द से रोया करती थी लेकिन आज वह अपना जीवन खुशहाल बीता रही है। उनकी परेशानी अब पहले से कम हो गई है उन्हें हर तरफ से आराम मिला है। आज उनकी जो भी तकलीफ कम हुई उसका सारा श्रेय वह यूनानी के मशहूर हकीम साहब को देती है। वह पहले से ज्य़ादा अब घर का काम कर लेती है और घर परिवार वालों का ध्यान रख पाती है। आज वह हकीम साहब का तहे दिल से शुक्रिया अदा करती है। वह यही चाहती हैं कि हकीम जी हमेशा स्वस्थ रहें और लोगों की मदद करते रहें। ताकि जैसे उनका जीवन खुशहाल हुआ है वैसे ही और लोगों का भी हो सकें।
गोंद सियाह क्या है ?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गोंद सियाह कैसे मिलता है और यह देखने में कैसा होता है। यह पौधा तिन्दुक कुल एबीनेसी का सदस्या है। इसके कालस्कंध (संस्कृत) ग्राम, तेंदू। यह समस्त भारतवर्ष में पाया जाता है। यह एक मध्यप्राण का वृक्ष है जो अनेक शाखाओं प्रशाखाओं से युक्त होता है। गोंद सियाह, पेड़ के तने को चीरा लगाने पर जो तरल पदार्थ निकलता है वह सूखने पर काला और ठोस हो जाता है उसे गोंदिया कहते हैं, गोंद सियाह देखने में काले रंग का होता है। यह बहुत ही पौष्टिक होता है उसमें उस पेड़ के औषधीय गुण पाये जाते हैं। गोंद सियाह हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है जो हमारे जोड़ों के दर्द के साथ शरीर की कई बीमारियों को हम से दूर रख सकता है।
असली गोंद सियाह मंगाने के दिए गए नंबर पर संपर्क करें।
011 6120 2464
- Clinic – The Herbals – Atiya Healthcare
- Address – 21B/6, Basement Near Liberty Cinema, New Rohtak Road, Karol Bagh, New Delhi-5
